Description
उत्पाद परिचय
यूरो-मधु खरबूजा एक उच्च गुणवत्ता वाली( हाइब्रिड (Hybrid किस्म है जो मीठे स्वाद, आकर्षक रंग और अधिक उपज के लिए प्रसिद्ध है। यह किस्म मुख्य रूप से गर्मी के मौसम में उगाई जाती है और बाजार में इसकी मांग बहुत अधिक होती है। इसके फल गोल से अंडाकार आकार के होते हैं, जिनका गूदा गाढ़ा नारंगी रंग का और अत्यधिक मीठा होता है।
विशेषताएं – इस वैरायटी की पौधे की प्रकृति बेलनुमा तेज बढ़ने वाली और मजबूत होती है इस वैरायटी के फल का आकार मध्यम से बड़ा (1.5 से 2.5 ) किग्रा प्रति फल होता है इसका रंग गढ़ा ,रसदार और सुगन्धित होता है इसका छिलका हल्का पीला जालदार पैटर्न वाला होता है इसका स्वाद बहुत मीठा होता है इसकी शर्करा (TSS) 13 से 15 प्रतिशत होता है यह बुवाई के 65 दिन बाद तुड़ाई योग्य हो जाती है इसकी उपज 25 से 35 टन प्रति हेक्टयर होती है
उपयुक्त भूमि – इस फसल के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी बहुत उपयुक्त है इस वैरायटी के लिए भूमि का PH मान 6.5 से 7.5 होना चाहिए
जलवायु –यह गर्म जलवायु में अत्यधिक उत्पादन देता है इस वैरायटी की फसल के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस का तापमान उपयुक्त होता है तथा इस वैरायटी की फसल को अत्यधिक वर्षा और नमी से सडन की संभावना बढ़ जाती है
बुवाई का समय –उत्तर भारत में इस की वैरायटी की फसल की बुवाई का समय फ़रवरी से अप्रैल तक तथा दक्षिण भारत में दिसंबर से फ़रवरी या जून से जुलाई तक की होती है |
फसल की तुड़ाई – जब फल की बाहरी सतह पर जालदार पैटर्न स्पष्ट दिखने लगे और सुगंध आने लगे तब फल तोड़ें और फल को सावधानी से तोड़ें और छायादार जगह पर रखे |
लाभ – यह एक जल्दी तैयार होने वाली किश्म है जो बहुत मीठा स्वादिष्ट और आकर्षक का होता है इसकी उपज बहुत भरपूर होती है तथा बाजार मूल्य भी बहुत अच्छी मिलता है | यह परिवहन के लिए उपयुक्त होता है तथा भण्डारण क्षमता अधिक होती है और इसकी बाजार में मांग निरंतर रहती है |
बीज दर – प्रति हेक्टेयर 800 से1000 ग्राम (1 किलो ग्राम) बीज पर्याप्त है
बुवाई की दूरी –कतार से कतार की दूरी 2.0 मीटर होनी चाहिए तथा पौधों से पौधों की दूरी 0.5 मीटर पर्याप्त है
खाद एवं उर्वरक –सड़ी हुई गोबर की खाद 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर का प्रयोग करे और किसी भी माइक्रोन्यूट्रीएंट्स ,खाद ,कीटनाशक के साथ या अलग से यूरोफूड (500 ग्राम 2 kg/एकड़ )का प्रयोग करने से अत्यधिक लाभ मिलता है तथा NPK-100:60:40 की मात्रा में प्रयोग करे तथा नाइट्रोजन को दो भागो में विभाजित करे |
सिंचाई –पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद करें तथा उसके बाद 7 से 10 दिन बाद निरंतर सिंचाई करे और फल पकने के समय अधिक पानी न दें वरना स्वाद और मिठास कम हो जाती है |
रोग एवं कीट नियंत्रण – डाउनी मिल्ड्यू, पाउडरी मिल्ड्यू, एफिड्स, व्हाइटफ्लाई रोंगों से बचने के लिए नीम आधारित कीटनाशक का प्रयोग करें और आवश्यकतानुसार कीटनाशक दवाओं ,अनुशंसित फफूंदनाशी दवाओं का प्रयोग यूरो स्टार के साथ मिलाकर प्रयोग करना अधिक लाभदायक होगा |
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